जब  तेरा  दर्द  – Shayari by Ahmad Faraz

Romantic Shayary by Faraz

जब  तेरा  दर्द 

जब  तेरा  दर्द  मेरे  साथ  वफ़ा  करता  है
एक  समंदर  मेरी  आँखों  से  बहा  करता  है

उस  की  बातें  मुझे  खुशबू  की  तरह  लगती  हैं
फूल  जैसे  कोई  सेहरा  में खिला  लगता  है

मेरे  दोस्त  की  पहचान  यही  काफी  है…
वो  हर  एक  शख्स  को  दानिस्ता खफा करता  है

और  तो  कोई  सबब  उसकी  मोहब्बत  का  नहीं
बात  इतनी  है  के  वो  मुझ  से  जफ़ा  करता  है

जब  ख़िज़ाँ  आयेगी  तो  लोट  आएगा “फ़राज़
वो  बहारों  में  ज़रा  कम  ही  मिला  करता  है…

 

 

Jab Tera Dard

Jab tera dard mere saath wafa karta hai
Ek samandar meri ankhon se bhaa karta hai

Us ki batain mujhe khushbo ki tarha lagti hain
Phool jaise koi sehra mein khila lagta hai..

Mere dost ki pehchan yahi kafi hai
Wo har ek shakhs ko danesta khafa karta hai

Aur to koi sabab uski mohabbat ka nahi
Baat itni hai ke wo mujh say jafa karta hai

Jab khizaan ayegi to lot ayega “FARAZ
Wo baharon mein zara kam hi mila karta hai…

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