तेरे वादे पर सितमगर – Mir Dagh Dhelvi Shayari

Mir Dagh Dhelvi

 

♥️ तेरे वादे पर सितमगर ♥️

अजब अपना हाल होता जो बिसाल-ऐ-यार होता

कभी जान सदके होती कभी दिल निसार होता

न मज़ा है दुश्मनी में न है लुत्फ़ दोस्ती में

कोई गैर गैर होता कोई यार यार होता

यूँ मज़ा था दिल्लगी का के बराबर आग लगती

न तुम्हें क़रार होता न हमें क़रार होता

तेरे वादे पर सितमगर अभी और  सवर  करते

अगर अपनी ज़िन्दगी का हमें ऐतबार होता .

 

 

♥️ Tere wade par Sitamagar♥️

Ajab apna hal hota jo visal-ae-yaar hota​

Kabhi jaan sadke hoti kabhi dil nisar hota​​

Na mzaa hai dushmani mein na hai lutf dosti mein​

Koi gair gair hota koi yaar yaar hota​

Yun mzaa tha dillagi ka ke barabar aag lagti​

Na tumhain qarar hota na hamain qarar hota​

Tere wade par sitamagar abhi aur sabar karte​

Agar apni zindagi ka hamain aitabar hota.

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